वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-

वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-

1-वायुमंडल-

पृथ्वी को घेरती हुई जितने स्थान में वायु रहती है उसे ‘वायुमंडल’ कहते हैं। वायुमंडल के अतिरिक्त पृथ्वी का स्थलमंडल (Litho sphere) ठोस पदार्थों से बना, और जलमंडल (Hydro sphere) जल से बना होते हैं। वायुमंडल कितनी दूर तक फैला हुआ है, इसका ठीक ठीक पता हमें नहीं है, पर यह निश्चित है कि पृथ्वी के चतुर्दिक्‌ कई सौ मीलों तक यह फैला हुआ है।

वायुमंडल के निचले भाग को (जो प्राय: चार से आठ मील तक फैला हुआ है) क्षोभमंडल (Troposphere), उसके ऊपर के भाग को समतापमंडल (Stratosphere) और उसके और ऊपर के भाग को आयनमंडल (Ionosphere) कहते हैं। क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच के बीच के भाग को ‘शांतमंडल’ (Topopause) और समतापमंडल और आयनमंडल के बीच को स्ट्रैटोपॉज़ (Stratopause) कहते हैं। साधारणतया ऊपर के तल बिलकुल शांत रहते हैं।

वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-
वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-

2-वायुमंडलीय आर्द्रता- 

वायु में उपस्थित जलवाष्प के ऊपर निर्भर करती है। यह जलवाष्प वायुमंडल के निचले स्तरों में रहता है। इसकी मात्रा सभी स्थानों में तथा सदैव एक सी नहीं रहती। समयानुसार उसमें अंतर होते रहते हैं। यह जलवाष्प नदी, तालाब, झील, सागर आदि के जल के वाष्पीकरण से बनता है।

3-वायुमंडलीय आर्द्रता में दो बातों पर ध्यान देना चाहिए :

 (क) परम आर्द्रता  किसी विशेष ताप पर वायु के इकाई आयतन में विद्यमान भाप की मात्रा को कहते हैं और (ख) आपेक्षिक आर्द्रता  प्रति शत में व्यक्त वह संबंध है जो उस वायु में विद्यमान भाप की मात्रा में और उसी ताप पर उसी आयतन की संतृप्त वायु की भाप मात्रा में होता है।

4-वायुमंडलीय आर्द्रता को मुख्यत:

 दो प्रकार के मापियों से मापते हैं : (1) रासायनिक आर्द्रतामापी एवं (2) भौतिक आर्द्रतामापी द्वारा।

5-वायुमंडलीय ताप

का मूलस्रोत सूर्य है। वायु को सूर्य की अपेक्षा पृथ्वी के संस्पर्श से अधिक ऊष्मा मिलती है, क्योंकि उसपर धूलिकणों का प्रभाव पड़ता है। ये धूलिकण, जो ऊष्मा के कुचालक होते हैं भूपृष्ठ पर एवं उसके निकट अधिक होते हैं और वायुमंडल में ऊँचाई के अनुसार कम होते जाते हैं।

अत: प्रारंभ में सूर्य की किरणें धरातल को गरम करती हैं। फिर वही ऊष्मा संचालन द्वारा क्रमश: वायुमंडल के निचले स्तर से ऊपरी स्तर की ओर फैलत जाती है। इसके अतिरिक्त गरम होकर वायु ऊपर उठी है, रिक्त स्थान की पूर्ति अपेक्षाकृत ठंढी वायु करती है; फिर वह भी गरम होकर ऊपर उठती है। फलत: संवाहन धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं।

अत: ऊष्मा के ऊपर फैलने में संचालन और संवाहन काम करते हैं। धरातल से वायुमंडल में ऊपर जाने पर ताप क्रमश: प्रत्येक 320 की ऊँचाई पर 1 फाo घटता जाता है।

वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-
वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-

6-वायुमंडलीय दबाव-

 इसका अर्थ है किसी स्थान के इकाई क्षेत्रफल पर वायुमंडल के स्तंभ का भार। किसी भी समतल पर वायुका मंडल दबाव उसके ऊपर की वायु का भारत होता है। यह दबाव भूपृष्ठ के निकट ऊँचाई के साथ शीघ्रता से, तथा वायुमंडल में अधिक दबाव पर धीरे धीरे, घटता है। परंतु किसी भी स्थान पर वायु का ऊँचाई स्थिर नहीं है। मौसम और ऋतुओं के परिवर्तन के साथ उसमें अंतर होते रहते हैं।

7-वायुमंडल का महत्त्व

वायु मानव सहित सम्पूर्ण जैव मण्डल का आधार है। पृथ्वी की सतह पर वायुमण्डल की गैसों की बनावट का अनेक प्रकार से प्रभाव पड़ता है। ऐसे प्रभाव की एवं वायुमण्डल की घटनाओं या आकस्मिक घटनाओं की खोज मनुष्य निरन्तर नव विकसित तकनीक, अनुभव, प्रेक्षण एवं दूरस्थ संवेदन (रिमोट सेंसिंग) तथा रॉकेट एवं उपग्रहों से सही-सही ज्ञान प्राप्त करता रहा है।

इसी कारण मानव द्वारा वर्तमान में वनों का विनाश करने, इनका सन्तुलन बिगाड़ने एवं बढ़ते हुए प्रदूषण के कुप्रभावों से वर्तमान वैज्ञानिक जगत बुरी तरह चिन्तित है, क्योंकि इसका प्रभाव वायुमण्डल के सन्तुलन एवं परतों गैसों के व्यवहार पर पड़ता है। इसका तेजी से एवं घातक प्रभाव मानव तथा अन्य जीवों पर भी पड़ने लगा है।

पृथ्वी तल का तापमान, गैसों का संगठन एवं मानव की सहनशीलता सभी इससे प्रभावित रहे हैं। इसी कारण परमाणु अस्त्रों पर रोक लगाई जा रही है। आज ओजोन परत में छिद्र होने की आशंका भी मानव एवं जैव-जगत को विशेष चेतावनी है।

वैज्ञानिक इस ओर भी निरन्तर सुधार के लिए उपाय सुझाते रहे हैं। अतः संसार के सभी देशों के निवासियों एवं जैव-जगत का हित इसी में है कि वायुमण्डल की निचली परतें स्वच्छ एवं सहज रूप में बनी रहें।

इसके लिए पृथ्वी की सतह पर वातावरण का सन्तुलन तथा मानव एवं जैव-जगत तथा प्रकृति के बीच मानव द्वारा सहयोग एवं सुखद स्थिति बनाए रखना आवश्यक है अन्यथा बढ़ते हुए प्रदूषण तथा विगड़ते हुए वायुमण्डल की सजा सम्पूर्ण मानव समाज को भुगतनी पड़ सकती है।

पश्चिम एशिया में तेल के कुओं तथा इण्डोनेशिया के जंगलों में लगी आग से स्थानीय रूप से भयंकर गर्मी व प्रदूषण बढ़ा है। अत: वायुमण्डल में बढ़ती हुई घातक गैसों व जहरीले धुएं से भूमण्डल का तापमान गिर भी सकता है।

वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-
वायुमंडल का विश्लेषण तथा प्रभाव-

वायुमण्डल की निचली परत असन्तुलित व दूषित हो सकती है। इनसे सम्पूर्ण भोजन श्रृंखला एवं जैव रसायन ही प्रदूषित होकर मानवशील क्रियाओं पर अनेक प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

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