अमीनो अम्ल की परिभाषा क्या है और अमीनो अम्ल के प्रकार व संरचना

अमीनो अम्ल की परिभाषा क्या है और अमीनो अम्ल के प्रकार व संरचना

अमीनो अम्ल नाइट्रोजन स्वांगीकरण के प्रारंभिक उत्पाद है। पौधों में अमीनो अम्लों का संश्लेषण पत्तियों व जड़ों के द्वारा होता है।

पौधों के अंगों की कोशिकाओं में श्वसन क्रिया के क्रेब्स चक्र के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्बनिक अम्ल संश्लेषित होते होते हैं, जो कि अमोनिया से संयोजित होकर अमीनो अम्ल बनाते हैं। अम्लों का संश्लेषण मुख्यतः दो विधियों द्वारा होता है।

  1. अपचयनशील अमीनीकरण
  2. ट्रांस अमीनीकरण

अपचयनशील अमीनीकरण

इस विधि में पादप कोशिकाओं में नाइट्रेट के अपचयन से प्राप्त अमोनिया तथा क्रेब्स चक्र से प्राप्त मध्यवर्ती कीटो अम्ल के बीच होने वाली अभिक्रिया के फलस्वरुप ग्लूटेमिक अम्ल बनता है।

इस अभिक्रिया में एक हाइड्रोजन दाता तथा एक अपचित सह-एंजाइम की आवश्यकता पड़ती है तथा यह ग्लूटेमिक में डिहाइड्रोजिनेज एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।

ट्रांस अमीनीकरण

इस विधि में किसी अम्ल के अमीनो समूह -NH₂ का स्थानांतरण एक अन्य कीटो अम्ल में हो जाता है जिसके परिणामस्वरुप नए अमीनो का संश्लेषण होता है तथा इसके साथ ही कीटो तो ग्लूटेरिक अम्ल पुनरुदभवन हो जाता है। ग्लूटेमिक मुख्य अम्ल है जिसके द्वारा इस विधि से 17 अम्ल का संश्लेषण किया जा सकता है। यह क्रिया ट्रांसऐमीनेज एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।

अनावश्यक अमीनो अम्ल का समूह

यह कुछ ऐसे अमीनो अम्ल है जो अनावश्यक होते हैं।

अमीनो अम्ल की परिभाषा क्या है और अमीनो अम्ल के प्रकार व संरचना

अमाइड

अमाइड में नाइट्रोजन की मात्रा अमीनो अम्ल की अपेक्षा ज्यादा होती है तथा अधिकांश प्रोटींस के लिए संरचनात्मक भाग होते हैं। पौधों में पाए जाने वाले दो सबसे अधिक महत्वपूर्ण अमाइड- एस्पेराजिन एवं ग्लूटेमिन है। इनका निर्माण ग्लूटेमिक एवं एस्पाटिक अम्ल से होता है।

प्रोटीन संश्लेषण

प्रोटीन का निर्माण अम्लों के मिलने से होता है, प्रोटीन में अमीनो अम्ल एवं अमाइडस बंध द्वारा संयोजित होकर एक लंबी श्रृंखला बनाते हैं, जिसे पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला कहते हैं। प्रोटीन इन्हीं पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं की बनी होती है।

विनाइट्रीकरण

इस क्रिया द्वारा मृदा यानी मिट्टी में उपस्थित अमोनियम यौगिक एवं नाइट्रेट का विघटन होता है जिसके फलस्वरूप स्वतंत्र नाइट्रोजन मिट्टी से निकलकर वायुमंडल में चली जाती है। इस क्रिया में भाग लेने वाले जीवाणु विनाइट्रीकारी जीवाणु कहलाते है।

जैसे- बैसिलस डीनाइट्रीफिकेन्स थायोबैसीलस डीनाइट्रीफिकेन्स, माइक्रोकोकस डीनाइट्रीफिकेन्स आदि। विनाइट्रीकरण द्वारा मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है अतः मिट्टी की उर्वरता घटती है।

अंतिम निष्कर्ष

भाइयों आज मैंने इस पोस्ट के माध्यम से आपको अमीनो अम्ल क्या है व इसकी परिभाषा और कुछ अनावश्यक अम्ल बताए हैं अगर आपको यह मेरी पोस्ट पसंद आती है तो इसे जरूर शेयर करें जी धन्यवाद।

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