प्रदूषण क्या है? | अर्थ | कारक | प्रदूषण की जानकारी

प्रदूषण क्या है?

नमस्कार दोस्तों अगर आप प्रदूषण के बारे में जानना चाहते हैं और दूषण क्या है इसका अर्थ क्या है यह कैसे उत्पन्न होता है इसके निवारण के क्या-क्या उपाय हैं तो हमने इस लेख में आपको इससे जुड़ी सभी जानकारी देने का प्रयास किया है तो अगर आप जानना चाहते हैं तो इस लेख को शुरू से आखिर तक जरूर पढ़ें।

प्रदूषण किसे कहते हैं?

पर्यावरण (वातावरण) मैं किसी भी तरह से, इस के किसी भी भाग को यदि परिवर्तित किए जाएं तो यह संतुलन परिस्थिति को प्रवाहित करता है अर्थात पारिस्थितिकी में छेड़छाड़ के परिणाम स्वरूप संतुलन बिगड़ जाता है, इसे प्रदूषण कहते हैं।

प्रदूषण का अर्थ है – प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। न शुद्ध वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना।  प्रदूषण कई प्रकार का होता है! प्रमुख प्रदूषण हैं – वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि-प्रदूषण।

प्रदूषण की परिभाषा-

प्रदूषण उन पदार्थों या चीजों के पर्यावरण में उपस्थिति या परिचय को संदर्भित करता है जो जीवित जीवों और प्राकृतिक दुनिया पर हानिकारक या जहरीले प्रभाव डालते हैं। यह विभिन्न मानवीय गतिविधियों या प्राकृतिक घटनाओं के कारण हो सकता है और मानव स्वास्थ्य, वन्य जीवन और पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है।

प्रदूषण से आप क्या समझते हैं?

पर्यावरण के किसी भी तत्व में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन, जिससे जीव जगत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, प्रदूषण कहलाता है। पर्यावरण प्रदूषण में मानव की विकास प्रक्रिया तथा आधुनिकता का महत्वपूर्ण योगदान है। यहाँ तक मानव की वे सामान्य गतिविधियाँ भी प्रदूषण कहलाती हैं, जिनसे नकारात्मक फल मिलते हैं। उदाहरण के लिए उद्योग द्वारा उत्पादित नाइट्रोजन आक्साइड प्रदूषक हैं। हालाँकि उसके तत्व प्रदूषक नहीं है। यह सूर्य की रोशनी की ऊर्जा है जो कि उसे धुएँ और कोहरे के मिश्रण में बदल देती है।

प्रदूषण क्या है?
प्रदूषण क्या है?

प्रदूषण दो प्रकार का हो सकता है। स्थानीय तथा वैश्विक। अतीत में केवल स्थानीय प्रदूषण को समस्या माना जाता था। उदाहरण के लिए कोयले के जलाने से उत्पन्न धुऑं, अत्यधिक सघन होने पर प्रदूषक बन जाता है। जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्कूल कॉलेजों में एक नारा सिखाया जाता था कि प्रदूषण का समाधान उसे हल्का कर देना है।

सिद्धान्त यह था कि विरल-कम-प्रदूषण से कोई हानि नहीं होगा। हाल के दिनों में हुयी शोधों से लगातार चेतना बढ़ रही है कि कुछ प्रकार का स्थानीय प्रदूषण, अब समस्त विश्व के लिए खतरा बन रहा है जैसे आणविक विस्फोटों से उत्पन्न होने वाली रेडियोधर्मिता। स्थानीय तथा वैश्विक प्रदूषणों की चेतना से पर्यावरण सुधार आन्दोलन प्रारम्भ हुये हैं। जिसके कि मनुष्य द्वारा की गयी गतिविधियों से, पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके, उसे कम से कम किया जा सके।

जैसे समुद्र के किनारे तथा झीलों में उगने वाली वनस्पति शैवाल आदि जो कि प्रदूषण का कारण है, औद्योगिक कृषि, रिहायशी कॉलौनियों से निकलने वाले अपf’kष्ट पदार्थ से प्राप्त पोषण से पनपते हैं। भारी तत्व जैसे लैड और मरकरी का जियोकैमिकल चक्र में अपना स्थान है।

इनकी खुदाई होती है और इनकी उत्पादन प्रक्रिया कैसी है उस पर निर्भर करेगा कि वे पर्यावरण में किस प्रकार सघनता से जाते हैं। जैसे इन तत्वों का पर्यावरण् में मानवीय निस्तारण प्रदूषण कहलाता है। वैसे ही प्रदूषण, देशज या ऐतिहासिक प्राकृतिक भूरासायनिक गतिविधि से भी पैदा हो सकता है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार (types of environment pollution)-

  1. वायु प्रदूषण ( Air pollution)
  2. ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution)
  3. जल प्रदूषण (water pollution )
  4. भूमि प्रदूषण ( land pollution)

वायु प्रदूषण ( Air pollution)-

” बाह्य पर्यावरण में धूल, दुआ, गैस, गंद एवं वाष्प मैं से एक या अधिक प्रदूषकों की हानिकारक मात्रा एवं दीर्घ अवधि तक उपस्थित जो मनुष्य, जानवरों पेड़ पौधों एवं संपत्ति के लिए घातक हो अथवा तर्क हीन ढंग से जीवन और संपत्ति के आनंदमय उपयोग में बाधाक हो, वायु प्रदूषण कहलाता है”

हेनरी परकिन्स (Henry Perkins)

( W.H.O) विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायु प्रदूषण की परिभाषा निम्न प्रकार है-

“वायु प्रदूषण एक ऐसी परिस्थिति है जिसमें बाह्य वायुमंडल में ऐसी पदार्थ एकत्र हो जाते हैं जो मनुष्य एवं उसके पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं।

वायु प्रदूषण के स्रोत (sources of Air pollution) –

  1. जनसंख्या वृद्धि (Increase in population)
  2. औद्योगिकरण (Industrialization)
  3. वनों की कटाई (Deforestation)
  4. जीवाश्म ईंधन का दहन (Burning of Fossil fuels)

ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution)-

शोर या ध्वनि प्रदूषण का अर्थ है वायुमंडल में उत्पन्न की गई अनचाही ध्वनि जिसका मनुष्य एवं अन्य प्राणियों के श्रवण तंत्र एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न शोर द्वारा मनुष्यों के लिए असहिष्णुता एवं परेशानी की दशा को व्यक्त करता है।

ध्वनि प्रदूषण के स्रोत (Sources of Noise pollution)

  1. उद्योग धंधे (Industrial Activities)
  2. यातायात के साधन ( Means of Tarnsport)
  3. लाउडस्पीकर ( Loudspeaker)
  4. सामूहिक मनोरंजन के कार्यक्रम ( social activities)

जल प्रदूषण (water pollution)-

“प्राकृतिक जल में किसी भी अवांछित बाह्य पदार्थ की उपस्थिति जिससे जल की गुणवत्ता में कमी आती हो जल प्रदूषण कहलाता है।” जल की गुणवत्ता का अर्थ है कि जल विभिन्न आवश्यक कार्यों जैसे- मनुष्य वह जंतुओं की पीने योग्य पेड़ पौधों की सही पोषण आदि के लिए उपयुक्त हो।

जल प्रदूषण के स्रोत (Source of water pollution)-

  1. घरेलू सीवेज ( Domestic Sewage)
  2. औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Wastes)
  3. प्रदूषण के अन्य स्रोत ( Other sources of pollution)

भूमि प्रदूषण ( land pollution)-

भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा कोई भी अवांछित परिवर्तन जिसका प्रवाह मनुष्य तथा अन्य जीवो पर पड़े या जिससे भूमि की प्राकृतिक गुणवत्ता तथा उपयोगिता नष्ट हो, भू प्रदूषण कहलाता है।

प्रदूषण को प्रभावित करने वाले कारक ( Factors Affecting Environment pollution)-

  1. जनसंख्या ( population ) – मानव को रहने के लिए भूमि, कृषि, पशुपालन, पीने के लिए जल एवं अन्य आर्थिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए स्थान की आवश्यकता जनसंख्या के अनुसार होती है। जनसंख्या वृद्धि का पर्यावरण वह परिस्थिति क्रम वह प्राकृतिक संसाधनों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  2. शहरीकरण (Urbanization)- शहरीकरण व औद्योगिक करण के परिणाम स्वरुप औद्योगिक कचरे वह कचरे से विघटित होने वाले रसायन, सेनेटरी कचरे से विघटित कई खतरनाक रसायन जैसे क्रोमियम, शीशा आदि।
  3. औद्योगिकरण (Industrialization) – विषैली गैसों के साथ ही बहुत सूक्ष्म पदार्थों के कणों का चिमनियो से उत्सर्जन।

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