सूचना प्रौद्योगिकी पर निबंध

कंप्यूटर नेटवर्क क्या है?( What is computer network)

विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी ( प्रस्तावना )-

वर्तमान युग को ‘ सूचना प्रौद्योगिकी ( तकनीक ) का युग ‘ के नाम से भी जाना जाता है । आज सूचना प्रौद्योगिकी का व्यावसायिक तथा सामाजिक आवश्यकता की दृष्टि से विशेष महत्त्व है इसकी सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तथा कम – से – कम समय में सूचनाओं का आदान – प्रदान किया जा सकता है । विज्ञान ने इस आवश्यकता को पूरा करने में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विज्ञान की इस भूमिका के सन्दर्भ में हम सार रूप में यह कह सकते हैं कि विज्ञान ने ही सूचना को प्रौद्योगिकी बनाया है । सूचना प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत सूचनाओं के आदान – प्रदान के लिए पहले केवल टेलीफोन का प्रयोग किया गया । उसके बाद टेलेक्स, फैक्स, पेजर, कम्प्यूटर आदि सूचना संसाधनों का प्रयोग आरम्भ हुआ । इसके पश्चात् इण्टरनेट के प्रयोग ने तो सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रान्ति ही ला दी है। आजकल इण्टरनेट, ई – मेल, मोबाइल फोन, टेलनेट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि सुविधाओं के प्रयोग ने मानव – जीवन को अति सुखमय एवं सरल बना दिया है।

सूचना प्रौद्योगिकी शब्द का आशय ऐसी स्वचालित पद्धतियों से है जो व्यावसायिक समंकों को प्रक्रिया बद्ध करती हैं । अन्य शब्दों में , सूचना प्रौद्योगिकी प्रत्यक्ष रूप से सरल एवं विशेष प्रक्रियाओं की सहायता से बहुत बड़ी संख्या समान सूचनाओं का प्रसार करती है । उदाहरणार्थ – एक कम्पनी के स्कन्ध ( Stock ) में होनेवाले परिवर्तन , रेलवे के टिकटों का आरक्षण ( Reservation ) आदि इसी प्रकार की प्रक्रियाएँ हैं।

कम्प्यूटर : एक वरदान –

आज सूचना प्रौद्योगिकी की समस्त क्रियाएँ कम्प्यूटर के माध्यम से संचालित की जाती है ; इसलिए कम्प्यूटर इसके लिए वरदान सिद्ध हुआ है ।

कंप्यूटर नेटवर्क क्या है?( What is computer network)
कंप्यूटर नेटवर्क क्या है?( What is computer network)

सामाजिक आवश्यकता –

सूचना प्रौद्योगिकी की समाज के लिए आवश्यकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि आज जीवन का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है । जन्म से जीवनपर्यन्त सूचना प्रौद्योगिकी हमारी हर साँस से जुड़ी है हमारे सभी सामाजिक उत्सव , पर्व , त्योहार , मनोरंजन , परम्परा , संस्कृति से लेकर हमारे खान – पान , रहन – सहन , व्यापार – उद्योग आदि के सरोकार सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े हैं । इसके अभाव में किसी समाज की उन्नति और विकास की कल्पना ही नहीं की जा सकती । जिस समाज में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रचार – प्रसार जितना अधिक होता है, उस समाज को उतना ही उन्नत और विकसित माना जाता है । इसी कारण तो आज अमेरिका , ब्रिटेन , फ्रांस , जर्मनी आदि देश संसार का सिरमौर बने हैं।

जन -जीवन पर इसका प्रभाव –

सूचना प्रौद्योगिकी के जन – जीवन पर पड़नेवाले प्रभाव को निम्नलिखित बिन्दुओं के रूप में समझा जा सकता है

सूचना प्रौद्योगिकी के सकारात्मक प्रभाव

  1. निर्णयन में सहायक – सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से व्यवसाय में प्रबन्धक एवं सम्बन्धित व्यक्तियों द्वारा आर्थिक एवं आनुपातिक निर्णय सही समय पर लिए जा सकते हैं , जिसका परिणाम यह होता है कि भविष्य में होनेवाली त्रुटियों तथा हानियों से सुरक्षा प्राप्त हो जाती है ।
  2. लिपिकीय कार्य में कमी – सूचना प्रौद्योगिकी एवं कम्प्यूटर की लिपिकीय कार्य में कमी आई है । संस्थान में पहले जिस कार्य को करने हेतु कई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती थी , उसी कार्य को अब केवल एक ही व्यक्ति कम्प्यूटर की सहायता से कम समय में पूर्ण करने में सक्षम है । इससे व्यावसायिक संस्थान पहले की तुलना में ज्यादा प्रतियोगी एवं गुणवत्तावाले उत्पाद एवं सेवाएँ कम लागत में प्रदान कर सकते हैं ।
  3. कर्मचारियों को प्रशिक्षण – सूचना प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत किसी भी संस्थान के कर्मचारियों को कम्प्यूटर कार्य का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है प्रशिक्षित होने के बाद कर्मचारी कम्प्यूटर का उपयोग जितनी अधिक कुशलता से करने में सक्षम होगा , वह संस्थान के लिए उतना ही अधिक उपयोगी माना जाएगा ।
  4. कर्मचारियों का रिकॉर्ड रखना – किसी संस्थान में कर्मचारियों का रिकॉर्ड बनाए रखने हेतु डाटाबेस को इस प्रकार बनाया जा सकता है कि वह विभिन्न कर्मचारियों के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारियों का रिकॉर्ड रख सके , जिससे आवश्यकता पड़ने पर कार्यकुशल लोगों से विशेष कार्य को सम्पन्न कराया जा सके ।
  5. विश्व स्तर पर लाभ – वर्तमान युग सूचना तकनीक का युग कहा जाता है और विश्व स्तर पर सूचना तकनीक का लाभ व्यक्तियों , संघों , कम्पनियों एवं विभिन्न राष्ट्रों को प्राप्त हो रहा है । आज फोन , मोबाइल , इण्टरनेट , फैक्स आदि सुविधाओं का प्रयोग करके आवश्यक जानकारियों एवं सूचनाओं को कुछ ही पलों में संसार के एक कोने से दूसरे कोने में भेजा जा सकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी के नकारात्मक प्रभाव

  1. बेरोजगारी में वृद्धि – वर्तमान युग में किसी भी कार्यालय , संस्था अथवा उपक्रम में अधिकांश कार्य कम्प्यूटर के द्वारा किए जा रहे हैं । जिस कार्य को पूर्ण करने में पहले व्यक्ति को कई दिन लग जाते थे , वही कार्य अब कम्प्यूटर द्वारा कुछ ही समय में कर लिया जाता है । इस प्रकार बेरोजगारी में निरन्तर वृद्धि हो रही है ।
  2. कम्प्यूटर एवं कैलक्यूलेटर की आदत – आजकल अधिकांश व्यक्ति कम्प्यूटर एवं कैलक्यूलेटर के आदी हो गए हैं अर्थात् वे कम्प्यूटर पर गेम , क्विज आदि में अपना अधिकतर समय व्यतीत कर देते हैं । कम्प्यूटर ऑपरेट करते समय वह प्राय : वातानुकूलित कमरे में बैठे रहते हैं , जिससे उन्हें इसकी आदत पड़ जाती है और उनके स्वास्थ्य के लिए यह आदत हानिकारक हो सकती है । इसी प्रकार , सामान्य गणितीय क्रियाओं ( जोड़ , घटाने , गुणा , भाग ) आदि के लिए भी वे कैलक्यूलेटर का प्रयोग करने लगते हैं , जिसके कारण कुछ समय बाद वह अपने आपको कैलक्यूलेटर के अभाव में गणितीय क्रियाओं को सम्पन्न करने में अक्षम पाते हैं ।
  3. गोपनीयता का अभाव – कम्प्यूटर के अन्तर्गत संस्थान में सभी प्रकार के डाटाबेस स्टोर रहते हैं ; उदाहरणार्थ – आर्थिक स्थिति की जानकारी , बैंक बैलेन्स आदि । कोई भी व्यक्ति कम्प्यूटर में डाटाबेस के अन्तर्गत इसकी जानकारी प्राप्त कर सकता है । इस प्रकार , कम्प्यूटर में संगृहीत किए गए आँकड़ों पर प्रायः गोपनीयता का अभाव पाया जाता है ।
  4. डाटाबेस की सुरक्षा को खतरा – बैंक एकाउण्ट को इलेक्ट्रॉनिक डाटा के रूप में रखते हैं । धनराशि निकालने के लिए ग्राहकों द्वारा एन्टी ० एम ० ( A.T.M. ) कार्ड का प्रयोग किया जाता है । इस प्रकार आज रिकॉर्ड कागजों में न रखकर मैग्नेटिक माध्यम से कम्प्यूटर में रखा जाता है । यदि कम्प्यूटर सिस्टम में वायरस होगा तो पूरा – का – पूरा डाटाबेस कुछ ही सेकण्ड में नष्ट हो सकता है । यदि डाटाबेस का बैकअप नहीं रखा गया होगा तो पूरे – के – पूरे रिकॉर्ड नष्ट हो जाते हैं । इस प्रकार डाटाबेस की सुरक्षा को सदैव खतरा बना रहता है ।

उपसंहार –

विश्व के लगभग सभी देशों तथा उनकी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक प्रगति एवं मानव संसाधन के विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग को सर्वमान्य रूप में स्वीकार कर लिया गया है। वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी का तीव्र-तम गति से विकास हो रहा है और यह विश्व का सबसे बड़ा उद्योग बनने के लिए तत्पर है। इसे एक ऐन्द्रजालिक (जादुई) तकनीक माना जा रहा है , जिसमें अनेक कुशल हाथ और तर्क-शील मस्तिष्क लगे हुए हैं। इसके पूर्व विश्व में ऐसा कोई भी साधन उपलब्ध नहीं था । इसके लिए प्रत्येक देश अपनी अर्थव्यवस्था की . बड़े स्तर पर योजनाएं बना रहा है तथा विभिन्न निर्णायक कदम भी उठा रहा है।

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