वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख प्रभाव।

वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख प्रभाव।

वैश्विक ताप वृद्धि –

औद्योगिकीकरण की बढ़ती प्रक्रिया के कारण वायुमण्डल में कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ी है, जिसने हरित गृह प्रभाव को जन्म दिया है। पृथ्वी पर पाई जाने वाली कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से धरती की सतह से परावर्तित किरणों द्वारा उत्सर्जित होने वाली तापीय ऊर्जा‌ को‌ वायुमंडल से बाहर जाने से रोकती है।

वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख प्रभाव।
वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख प्रभाव।

इस प्रकार तापीय ऊर्जा के को वायुमण्डल वायुमण्डल में सान्द्रण से धरती के औसत तापमान में वृद्धि होती है, जिसे विश्व व्यापी तापन (Global Warming) कहते हैं।

वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख प्रभाव-

तापमान में वृद्धि (Increase in Temperature)

Co,‌ की सान्द्रता इस समय 340ppm है और सन् 2030 के लगभग इसके 640ppm तक पहुंच जाने की सम्भावना है। यदि ऐसा हुआ तो भूमण्डल का औसत तापमान 1.5 4.5 °C तक बढ़ जाएगा जिससे कई भयंकर परिणाम मानव जाति को झेलने पड़ सकते हैं।

ताप वृद्धि से हिमालय के हिमनद हिम झीलों में परिवर्तित हो रहे हैं। ये झीलें प्रतिदिन चौड़ी होती जा रही हैं। अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका ‘न्यू साइंटिस्ट’ के अनुसार सन् 2025 तक हिमालय के सभी हिमनद नष्ट हो जाएंगे जिसके दौरान विकराल बाढ़ की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

जिसका प्रभाव घाटी के आसपास पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा। ताप वृद्धि से ध्रुवीय एवं उच्चपर्वतीय बर्फ पिघलने से समुद्री किनारे पर स्थित कई शहर डूब सकते हैं।

ध्रुवीय बर्फ का पिघलना (Melting of Polar Ice) –

ध्रुवों पर जमी हुई बर्फ के रूप में लगभग 7 मिलियन घन मीटर जल मौजूद है। यह सम्पूर्ण बर्फ पिघल जाए तो समुद्र का तल 7-8 मी. तक ऊंचा उठ जाएगा जिससे कई द्वीप समूचे ही जलमग्न हो जाएगे , लेकिन वर्तमान अनुमान के अनुसार समुद्र तल के 5 मी. ऊपर उठने की ही सम्भावना है।

समुद्र तल का बढ़ना (Increase in Sea Level) –

भूमण्डल के औसत तापमान में 1.5-5.5 °C की वृद्धि से समुद्र का तल 25-165 सेमी तक बढ़ जाने की सम्भावना है। समुद्र तल दो कारणों से बढ़ता है, पहला समुद्री जल की ऊष्मीय प्रसार एवं दूसरा ध्रुवीय बर्फ का पिघलना अगर उपरोक्त कारणों से समुद्र तल बढ़ जाए तो खाड़ी के किनारे के क्षेत्र जैसे-बांग्लादेश अमेरिका का बोस्टन शहर,‌ कोलकाता शहर आदि अनेक निचले शहरों के पूर्ण रूप से डूब जाने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

मौसम परिवर्तन (Change in Weather) –

भूमण्डल के औसत तापमान में 3 °C की वृद्धि से उच्च अक्षांश पर औसतन ताप 10 °C तक बढ़ जाएगा। आने वाले समय में ग्रीन हाउस इफेक्ट के कारण सर्दी की ऋतु छोटी एवं आर्द्र हो जाएगी और गर्मी की ऋतु लम्बी एवं शुष्क हो जाएगी ताप वृद्धि से वाष्पीकरण अधिक होगा एवं 7 से 11% तक वर्षा अधिक होने लगेगी।

प्रजातियों पर प्रभाव (Effects on Species) –

प्रत्येक पादप एवं जीव जन्तु एक विशेष ताप क्रम सीमा में जीवित रहते हैं। भूमण्डलीय तापन के कारण ताप में वृद्धि हो जाएगी। ऐसे में बहुत सी प्रजातियां ध्रुवों की ओर स्थानान्तरित हो सकती हैं और कई प्रजातियां, जो जल्दी स्थानान्तरित नहीं हो सकती, वे मर भी सकती हैं। बहुत से पेड़-पौधे विलुप्त हो सकते हैं।

अन्न उत्पादन (Food Production) –

भूमण्डलीय ताप वृद्धि पेड़ पौधों के कीड़ों एवं बीमारियों के अधिक बढ़ जाने, घास-पात के अधिक उगने एवं पौधों की श्वसन क्रिया के तेज हो जाने के कारण फसलों की पैदावार को घटा देती है।

एक अनुमान के अनुसार दक्षिण पूर्व एशिया में चावल का उत्पादन प्रति 1°C ताप वृद्धि में 5% कम हो जाएगा। यद्यपि वायुमण्डल में CO, सान्द्रण में वृद्धि फसलों की उपज बढ़ाने में सहायक होती है फिर भी विश्व का कुल अनाज उत्पादन भूमण्डलीय ताप बढ़ने पर घट जाएगा। जलवायु संरचना में परिवर्तन अकाल के रूप में भी परिलक्षित होता है।

अमरीकी पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी के एक अध्ययन के अनुसार सन् 2060 तक दुनिया का चावल, गेहूं तथा अन्य खाद्यान्नों का उत्पादन 1.2 से 7.6 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। तापमान वृद्धि से विश्व जल संकट को भी गति मिलेगी।

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प्रश्न ओर अत्तर (FAQ)

वैश्विक ताप वृद्धि क्या है।

औद्योगिकीकरण की बढ़ती प्रक्रिया के कारण वायुमण्डल में कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ी है, जिसने हरित गृह प्रभाव को जन्म दिया है। पृथ्वी पर पाई जाने वाली कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से धरती की सतह से परावर्तित किरणों द्वारा उत्सर्जित होने वाली तापीय ऊर्जा‌ को‌ वायुमंडल से बाहर जाने से रोकती है।

पृथ्वी पर तापमान के वृद्धि के क्या कारण है?

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन यथा कार्बनडाई आक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड आदि के उत्सर्जन में वृद्धि पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। भूमि उपयोग में परिवर्तन भी इसके लिये जिम्मेदार है यथा इससे सतह के एल्बीडो में वृद्धि हुई है।

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